गाइड टू चाइल्ड केयर बुक रिव्यु
डॉ. आर. के. आनंद ( MD. Pediatrics. ) जो कई देशो के सीनियर चाइल्ड स्पेशलिस्ट रह चुके है। मुंबई के जसलोक हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर में पीडियाट्रिक्स एंड Neonatology डिपार्टमेंट के हेड भी है।
यह पुस्तक भारतीय माता-पिताओं को गर्भवस्था और शिशु-पालन के बारे में प्रैक्टिकल और आसान जानकारी देती है। भारत में सभी बच्चों के पालन - पोषण से जुड़ी परंपरागत जानकारियों को चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में आधुनिकतम विकास के साथ जोड़कर प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है।
इस पुस्तक में बच्चे होने के बारें में सोचने से लेकर बच्चा होने एवं उसके देख - भाल के बारे में विस्तृत जानकारी मिलता है जिस में आप जान सकते है -
- गर्भवस्था के बारे में
- बच्चें के जन्म की योजना
- प्रसव - पीड़ा और प्रसव
- अस्पताल में नवजात शिशु की देख भाल
- नवजात शिशु में सामान्य विविधताएँ
- नवजात शिशु की देखभाल बढ़त के वर्ष: सामान्य बढ़त और विकास
- टीकाकरण
- विभिन्न आयु - चरणों में व्यव्हार
- बच्चों की भावनात्मत जरूरतों को समझना एवं पूरा करने का तरीका
- नवजात एवं नन्हें शिशु का पोषण
- छोटे बच्चों का पोषण
- बच्चों की बीमारियां एवं इलाज
- आम एलेर्जियाँ
- कीड़े - मकोड़े का काटना एवं डंक मारना
- हाफना सांस फूलना
- आँखों के संक्रमण
- समस्याएं -गर्दन दर्द एवं अन्य अंगो की गांठे
- सरदर्द पीलिया
- आपात स्थितियाँ क्या है
- स्वस्थ आदतें
- दुर्घटनाओं से बचाव
- अस्पताल प्रवास
ऊपर दिए गए हर विषय को विस्तार से बताया गया है, मेरा मानना है की हर घर में यह किताब होनी चाहिए जिससे की हर घर स्वस्थ एवं समृद्ध के साथ -साथ बच्चें का भविष्य आसान बनाया जा सके। यह पुस्तक बच्चों के देखभाल कैसे करें को विस्तारपूर्वक बताया गया हैं इस पुस्तक में बच्चें के जन्म से लेकर किशोर अवस्था तक कैसे देखभाल करें, हर अवस्था एवं समयनुसार बच्चों में क्या परिवर्तन होता है और उस समय उस बच्चें को कैसे समझाए की बच्चा बिना किसी पनिशमेंट के मन जाये।
बच्चों में आध्यात्मिक जुड़ाव भी बहुत जरुरी हो गया है आज बच्चें अध्यात्म को भूल सा गए है जिससे वे बहुत ज्यादा फ़्रस्टेड, निराशावादी एवं नेगेटिव होते जा रहे है। इसे बदलना अति आवश्यक है।
इस पुस्तक में आप के जीवन में स्वाथ्य से जुडी हर प्रश्नो का उत्तर मिल जायेगा वह फिर चाहें गर्भ धारण से लेकर बच्चें को बड़ा करने तक आप के जीवन में आने वाली हर परेशानी से आप को पहले ही आगाह कर देगा जिस से आप अच्छे निर्णय लेने में कामयाब हो सकें।
इस पुस्तक में आप के जीवन में स्वाथ्य से जुडी हर प्रश्नो का उत्तर मिल जायेगा वह फिर चाहें गर्भ धारण से लेकर बच्चें को बड़ा करने तक आप के जीवन में आने वाली हर परेशानी से आप को पहले ही आगाह कर देगा जिस से आप अच्छे निर्णय लेने में कामयाब हो सकें।
बच्चें के जन्म की योजना
बच्चें के जन्म की योजना के लिए केवल गर्भवती एवं उस के बच्चे की देखभाल करने से ज्यादा जरुरी है की एक स्त्री की देखभाल उसके बचपन से ही किया जाए। सही उम्र में गर्भ धारण करना बहुत जरुरी है गर्भ धारण करने की सही उम्र 23 से 35 वर्ष है। बच्चों के जन्म में 2 - 3 वर्ष का अंतर अच्छा माना जाता है जिससे बच्चो का अच्छा मानसिक एवं शारीरिक विकाश हो सके।
गर्भवस्था
आपका मासिक - चक्र जैसे ही रुके एवं जैसे ही संदेह हो तुरंत डॉ. से मिले एवं डॉ. द्रवारा बताएं गए जाँच एवं सावधानियां जरूर बरते एवं (गाइड टू चाइल्ड केयर ) किताब को जरूर पढ़े।
गर्भवस्था के दौरान स्त्रियों में खून की कमी कैल्सियम , आयरन की कमी होना आम बात है इस लिए अपने खाने में कैल्सियम एवं आयरन से भरपूर भोजन करें।
यह पुस्तक में ऐसा लग रहा है की सब कुछ आप को दे दू लेकिन कुछ लिमिटेशन है। आप यह बुक जरूर पढ़े एवं अपने बच्चे को और परिवार को खुश रखें।













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