पावर ऑफ़ हैपर फोकस (Power Of Hyper Focus )
वो कहते है न समस्या ही अविष्कार की जननी है इसी तरह कुछ Chris Bailey के साथ हुआ Chris Bailey अपने काम में फोकस नहीं कर पते थे फिर उन्होंने निश्चय किया की वे एक ऐसी किताब लिखेंगे जो फोकस न कर पाने वालो की समस्या को दूर कर सके। Chris Bailey की वाल्वर्ट घूम कर कुछ ऐसे रिसर्चर से मिले जिन्होंने Focus and attention पर सालों रिसर्च किया था और Chris Bailey ने इन सभी पर रिसर्च एवं पढ़ने के बाद एक लगभग २६००० अक्षरों का एक नोट्स तैयार किया फिर उस के बाद एक किताब लिखा हाइपर फोकस (Hyper Focus).
आज हम इसी किताब के कुछ महत्वपूर्ण बातों को आप से साझा करेंगे -
1.ऑटोपायलट मोड बंद करना Switching off Autopilot Mode
लेखक के अनुसार हमारे 40 % काम हमारी आदतों से होते है इन्हें करने से पहले हमें ज्यादा सोचना नहीं पड़ता जैसे सोते समय mobile का स्तेमाल करना फ्री समय में सोशल मीडिया का स्तेमाल करना इत्यादि। लेखक कहते है की ऑटो पायलट मोड में मत जिओ क्यों की ये हम से वो कार्य करवाती है जो हमें आगे चलकर हमारे असफल होने का भी काम करता है। रिसर्च से पता चलता है को हमारी आंखे धीरे काम करती है जब हमारा दिमाग कुछ सोच रहा होता है, इस लिए Chris Bailey कहते है की ये दोनों एक करती है एवं इसे ध्यान में रख कर कार्य को चार प्रकार में बाटतें है।
इंटेन्सेली एक ही चीज़ पर ले आते है तब हम हाइपर फोकस हो जाते है।
लेखक के अनुसार हाइपर फोकस के चार स्टेजेस होते है
१. ज़रूरत मंद एवं लाभकारी काम को चुनना जिस पे आप काम करना चाहते है।
२. बहरी और अंदुरुनी डिस्ट्रक्शन को खत्म करना
३. जो कार्य आप ने चुना है उस पर पूरी तरह से समर्पित होना।
४. लगातार अपना फोकस अपने काम पर वापस लाना जो जरुरी है और जो कर रहे है।
तो हाइपर फोकस में जरुरी और कठिन दिखने वाले टास्क पर अटेंशन बना के रखना होता है। एवं इस को अच्छे से फॉलो करने के लिए 3 इन्टेंशनल टास्क को चुने जो आप उस दिन करना चाहते है किसी एक काम को करने के पीछे उसके दूसरे और तीसरे को भी करना है इसे करने के लिए आप Timer सेट करे एवं देखे की आप उस एक घंटे में फोकस था या आप Auto Pilot Mode में थे।
४. Taming Distraction
टीममिंग डिस्ट्रक्शन का मतलब है अपने डिस्ट्रक्शन को अपने हिसाब से नियंत्रित करना एवं अपने काबू में करना। डिस्ट्रक्शन के कण्ट्रोल में आप नहीं डिस्ट्रक्शन आप के अधीन होना चाहिए।
चार तरह के डिस्ट्रक्शन है -
१. पहला कष्टप्रद है और उस पर कण्ट्रोल नहीं है जैसे ऑफिस गेस्ट, सोर-गुल इत्यादि।
२. दूसरा हमारे कण्ट्रोल में तो नहीं है लेकिन उस में मज़ा आता है
३. Annoying है लेकिन आप उसे कण्ट्रोल कर सकते है। जैसे ईमेल, कॉल्स, मीटिंग इत्यादि।
४. कुछ ऐसे टास्क है जिसे करने में मजा आता है लेकिन उसे कण्ट्रोल कर सकते है जैसे न्यूज़ वेबसाइट, सोशल मीडिया, मेसेजिंग etc .
लेकिन इन सभी डिस्ट्रक्शन से आप का कोई कण्ट्रोल नहीं रहेगा लेकिन आप इसे कंट्रोल करों।
जो आप के कंट्रोल में नहीं है और कष्टप्रद है आप को फोकस के लिए इसे करना ही होगा।
जो आप के कण्ट्रोल में नहीं है लेकिन मज़ा आता है उसे आप एन्जॉय कर सकते हैं।
जो आप के कण्ट्रोल में है लेकिन कष्टप्रद है एंड मज़ा आता है उसे आप समय से पहले करने की कोसिस करें।
4. Your Brain's Hidden Creative Mode ( दिमाग में छिपी रचनात्मकता )
स्कैटर फोकस का मतलब है किसी एक चीज़ पर फोकस न करना बल्कि अपने सोच को क्रिएटिव एवं फ्री रखना जहा हाइपर फोकस पर अपना फोकस किसी एक चीज़ पर करतेहै वही स्कैटर फोकस में किसी एक चीज़ पर फोकस न करना। Hyper Focus में हम बाहरी कार्य या चीज़ो पर ध्यान केंद्रित (Focus ) करते है वही स्कैटर फोकस में अपना अटेंशन अपने अंदर करने की कोसिस करते है। हाइपर फोकस अटेंशन के बारे में वही स्कैटर फोकस नॉन- अटेंशन के बारे में है।
हमारा मन जहा भूत एवं वर्त्तमान के बारे में सोचने से ज़्यादा भविष्य के बारे में सोचता है। हम आम तौर पर त्वरित भविष्य के बारे में सोचते है इस लिए ज़्यादातर समय Planning में बीतता है इसलिए Scatter Focus बुद्धिमत्ता से किसी चीज़ को हल करने ज्यादा सक्क्षम होता है।
1. आप को अपने दिमाग़ को मुक्त छोड़ना होगा एवं जो भी विचार आये उस को लिखिए।
2 . उस प्रॉब्लम्स को दिमाग में रोक के रखना है जिस को आप हल करना चाहते है।
3. आप अपने दैनिक कार्य करते समय आये हुए विचार को लिखें।
6. Recharging Your Attention
जरुरत के अनुसार अच्छी नींद लेना 58 % तक अटेंशन ( ध्यान ) को बढ़ा सकता है अगर आप काम के बीच में आराम करते है तो यह आप के Attention को बढ़ा सकता है और लेखक कहते है की हम मेन्टल हेल्थ को रिचार्ज एवं रिफ्रेश होने के लिए जितना ज्यादा टाइम देंगे उतनी ज्यादा एनर्जी हमारे पास होंगी जरुरी कार्य को करने के लिए।
आप के कार्य के बीच में ऐसे कार्य शामिल हो जिससे आनंद आता हो आप के आदत में शामिल होने चाहिए एवं कुछ ऐसा जो आप की खुसी से जुड़ा हो परंतू आप के काम से जुड़ा नहीं होना चाहिए।














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